ख़्याल

कई दफ़ा सोचा मैंने…मैं ख़्याल को बयान करूँ कुछ हर्फ़ में, अल्फ़ाज़ में, क़लम से उतार दूँ कभी लगते हैं … More

इंसान

न ज़माने में मशहूरी हो न लियाकत का इल्म हो न शक्ल का हिसाब रहे न अक्ल का घुमान हो … More