ख़्याल

कई दफ़ा सोचा मैंने…मैं ख़्याल को बयान करूँ कुछ हर्फ़ में, अल्फ़ाज़ में, क़लम से उतार दूँ कभी लगते हैं … More

रुख़सती

रुख़सती चाहता है दिल सारी मसरूफ़ियत को अलविदा कह दूँ आख़िरी सलाम कह दूँ मैं उलझनों को और बेसबब दिल … More

ज़िंदगी

जब भी पूछा है ज़िन्दगी कैसी कटती जा रही है दिन के आग़ाज़ से,शाम के ढलने तक बस तलाश सी … More

अभी बाकी है

ख्वाहिशें बेहिसाब हैं दिल की पर तेरी ख्वाहिश करना अभी बाकी है फुरसत से भरी है ज़िन्दगी पर तेरे लिए … More

इंसान

न ज़माने में मशहूरी हो न लियाकत का इल्म हो न शक्ल का हिसाब रहे न अक्ल का घुमान हो … More